कबूतरी देवी "उत्तराखंड की तीजनबाई"
कबूतरी देवी "उत्तराखंड की तीजनबाई"
उत्तराखंड की लोकगायिका "कबूतरी देवी" सामान्य परिचय-
जन्म- 1945 AD में लेटीगांव, काली कुमाउ क्षेत्र चम्पावत में एक मिरासी (लोकगायन का कार्य करने वाले) परिवार में हुआ था
संगीत की प्रारंभिक शिक्षा- अपने पिता रामकली और उनके गांव के देव राम और देवकी देवी से.
इनके पति दीवानी राम ने इनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्होंने कबूतरी देवी को स्थानीय मेलो और आकाशवाणी मैं गाने के लिए प्रेरित किया, कबूतरी देवी अपने पति दीवानी राम को नेताजी कहकर पुकारती थी.
पहाड़ी संगीत की लगभग सभी प्रमुख विधाओं में पारंगत कबूतरी देवी मंगल गीत, ऋतु रैण, पहाड़ के प्रवासी के दर्द, कृषि गीत, पर्वतीय पर्यावरण, पर्वतीय सौंदर्य की अभिव्यक्ति, भगनौल न्यौली जागर, घनेली झोड़ा और चांचरी प्रमुख रूप से गाती थी कबूतरी देवी सामान्यतः "ऋतुरैण" ऋतु आधारित लोकगीतों को गया करती थी
2002 में नवोदय पर्वतीय कला केंद्र पिथौरागढ़ ने उन्हें छोलिया महोत्सव में आमंत्रित कर सम्मानित किया, इसके अलावा लोकसंस्कृति कला एवं विज्ञान शोध समिति अल्मोड़ा व पहाड़ संस्था ने कबूतरी देवी जी को सम्मानित किया। उत्तराखण्ड का संस्कृति विभाग भी उन्हें प्रतिमाह पेंशन देता था
2016 में 17वें राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार ने उन्हें लोकगायन के क्षेत्र में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया था
प्रमुख गीत-
आज पनि जांऊ जांऊ,
भोल पनि जांऊ जांऊ
पोरखिन कै न्हैं जौंला।
स्टेशन सम्म पुजै दे मलै
पछिल वीरान ह्वे जौंला ।।
आज पनि जांऊ जांऊ-२
स्टेशन जौंला टिकट ल्यौंला
गाड़ी में भै जौंलां
स्टेशन सम्म पुजै दे
मलै
पछिल वीरान ह्वे जौंला ।।
आज पनि जांऊ जांऊ..
भात पकाय बासमती को
भूख लग्या खै जौंला
उदास लागेलि
डेरा
पहाड़ ऐ जौंला
पहाड़ ऐ जौंला
स्टेशन सम्म पुर्जे दे मलै
पछिल वीरान ह्वे जौंला।।
आज पनि जांऊ जांऊ..
मृत्यु- 5 जुलाई 2018 को अस्थमा व हार्ट की दिक्कत के बाद रात्रि एक बजे कबूतरी देवी को पिथौरागढ़ के जिला अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। उनकी बिगड़ती हालत को देखकर 6 जुलाई को डॉक्टरों ने देहरादून हायर सेंटर रेफर किया था। लेकिन धारचूला से हवाई पट्टी पर हेलीकॉप्टर के न पहुंच पाने के कारण वह इलाज के लिए हायर सेंटर नहीं जा पाई। इस दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें वापस जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद अगले दिन सुबह 10:24 बजे उनका निधन हो गया। 8 जुलाई 2018 को रामेश्वर घाट में सरयू नदी के किनारे उनकी अंत्येष्टि की गई


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