गढ़िया वंश का इतिहास

 नमस्कार दोस्तों
               आज मैं आपको एक "गढ़िया वंश" के  इतिहास के बारे में बताने जा रहा हूं. आइए जानते है कैसे गढ़िया वंश का उदय और विकास हुआ.
        बात उन दिनों की है जब औरंगजेब का शासन था  देश मुगलों के अधीन था। पूरे देश में मुगलों का शासन था उनके अत्याचार पूरे देश में फैले थे। औरंगजेब ने बहुत अत्याचार किये और बहुत राजाओ को हराकर उनका राज्य अपने राज्य में मिला दिया। उन दिनों गढिया जाति  के लोग राजस्थान में रहते थे। तब वहा औरंगजेब के अत्याचारो के कारण  मजबूरन उनको वहा से पलायन करना पड़ा फिर वहा से  पलायन के पश्चात वे अस्कोट नामक स्थान पर बस गए जो की वर्तमान में पिथौरागढ़ जनपद में है। वह समय ताकत का था उस दौरान जिसके ज्यादा बच्चे होते थे उसका ज्यादा प्रभाव रहता था मतलब यूँ की जिसके ज्यादा
लड़के होते थे उसकी ज्यादा शक्तिशाली या प्रभावशाली माना जाता था फिर उन्होंने वहा से भी पलायन किया और तुर्ती (गढ़वाल) में बस जाते हैं जो वर्तमान में उत्तराखंड के चमोली जनपद में स्थित है वहाँ उन्होंने अपना दूसरा विवाह किया और  जीवन स्थापित किया .. जो गढ़िया जी थे उनकी दो पत्निया थी तो जैसा की आपको ऊपर बताया गया है की जिसके ज्यादा लड़के होते थे उसे उतना शक्तिशाली माना जाता था, तो दोनों रानिया अपने लड़को का वर्चस्व स्थापित कराने के षडयंत्र करने लगे जिससे सौतेले भाई आपस में लड़ने लगें। इसलिए एक माँ के लड़के चमोली में ही रह जाते हैं
                वहीं दूसरी माँ के लड़के बागेश्वर के हरसिला (सीमा) नामक गांव में बस गये। उनके साथ-साथ  गढ़िया वंश की कुल देवी माँ भवानी भी उनके साथ हरसिला आयी।
हरशिला आयी रानी( पहली पत्नी)  के  ४ बेटे थे, जिनका नाम निम्नवत हैं-
1) भीमल  सिंह (बलाव सिंह / भीम  सिंह ) 
2) कोमल सिंह (कालू सिंह )
3) जयमल सिंह
4) हरमल सिंह 
तत्पश्चत हरशीला से सबसे बड़े भाई भीम सिंह और सबसे छोटे भाई हरमल सिंह वहाँ से नई जगह की तलाश में अपने परिवार के साथ निकल पड़े और कुलदेवी मां भवानी को भी अपने साथ ले गए क्योंकि माना जाता था कि सबसे बड़ा भाई अपने पितरों ओर कुलदेवी का संरक्षण और पूजा पाठ  करेगा, आज भी यह परम्परा देखने को मिलती है। तो इस प्रकार भीम सिंह और हरमल सिंह दोनों भाई "पोथिंग" पहुंच गए  और वहां  उन्होंने अपना ठिकाना बनाया और साथ ही कुलदेवी मां भवानी (भगवती मंदिर) स्थापित किया। 
     साथ ही बाकी दो भाई जयमल सिंह और कोमल सिंह (कालू सिंह ) हरसिला में ही रहने लगे, फिर उनका परिवार बडा हो गया और उन दोनों के बेटे और उनका परिवार वहा से दूसरी जगह बस गए उनमे से कोमल सिंह (कालू सिंह) के बेटे सुमटी-बैसानी वाली घाटी की ओर निकल पड़े और वहा बस गए।
       वहीं जयमल सिंह के बेटे दूसरी तरफ पुंगर घाटी की और चल पड़े और वहा बस गये। बाद में इनका भी परिवार बढ़ता गया दोनों भाइयो का और पुंगर घाटी के जो वर्तमान गांव है किरोली,  रीमा, नाकुरी आदि में फ़ैल गए और साथ ही सुमटी बैसानी वाली घाटी में भी फ़ैल गए। दोनों अपने-अपने परिवार के साथ रहने लगे और इनका वंश फैलता गया। 
जो भीम सिंह और सबसे छोटे भाई हरमल सिंह पोथिंग में बस गए थे उनका भी परिवार बढ़ता गया। साथ ही सबसे बड़े भाई भीम सिंह ने माँ भवानी (भगवती माता मंदिर) पोथिंग में स्थापित कर लिया था जब साल में एक दिन कुलदेवी की पूजा आयोजित की जाती थी तो सभी भाई उस पूजा में अपने परिवार के साथ शामिल हुआ करते थे।  बाद में सभी भाईयो ने अपने-अपने गावों में माँ भवानी की पूजा करनी आरम्भ  कर दी, क्योंकि अब जनसँख्या भी बहुत ज्यादा हो गयी थी
             बाद में पोथिंग में भी ज्यादा जनसँख्या होने की वजह से कुछ गढ़िया परिवार गडेरा गांव, तोली गाँव, लीली, फरसाली आदि जगहों पर बस गए।
By- हेमन्त सिंह गढ़िया
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उत्तराखंड में पटवारी व लेखपाल भर्ती- 2021

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